बज़्म में हर निगाह शक भरी उठी..
जब वो मुस्करा कर लौटा शाम दफ़्तर से

पूछने पर बोला बस आज तोड़ दी ज़ंजीर..
तलवार पार कर आया जिरह-बक्तर से

नौजवान था वो, मेहनतकश, ईमान का मुरीद..
दुआ करते के नज़र ना लगे उसे, सब अपने अख़्तर से

महफ़िल में सन्नाटा और उसके रूख पर जुनून..
झटक कर उसने जब निचोड़ा लहू अपने अस्तर से

मुर्दों के इस शहर में आख़िर वो भी मार आया ज़मीर..
लग कर सो भी ना सकेगा वो आज अपने बिस्तर से !!