मेरे अरमानों का सौदा भी कर ले
और कान पकड़ तौबा भी कर ले..

मिलूँ ना मिलूँ शायद कल तुझे..
आज रुआंसा ही क्यूँ रोता भी कर ले..

तेरे ख़यालों में बन गई आँखें बादल..
इनके बरसने का मौक़ा ही कर ले..

ज़रा नज़रें झुका तबाही पर मेरी..
थोड़ी हमदर्दी का धोखा ही कर ले..

हैरान हैं वो कहाँ गए गुल से काटें..
मेरी आस्तीनों में खोजा भी कर ले..

दिन सब गए तेरा ग़म पीते पीते..
के दिल ज़रा अब रोज़ा भी कर ले..