अक्सर जो तन्हाई में तुम्हें हमदम सा लगे..
उसके यारों कि महफ़िल में ज़रा कम सा लगे

माना कि तकरार होगी, तुम फिर मना लोगे..
पर क्यूँ वो रिश्ते निभाना जिन में दम सा लगे

जान संगमरमर तुझे ख़्वाब रेशमी लाया था..
उधेड़ ही देना उसे गर ख़म-ब-ख़म सा लगे

ख़्वाब टूटने पर अब कोई आवाज़ नहीं होती..
बस पलकों के किनारे पर थोड़ा नम सा लगे

दर्द-ए-दिल इस बार तो हमने सह लिया शायर..
अब वो खिलौना भी मत लेना जो हम सा लगे