चलो अब नए दोस्त बनाएँ जाएँ..
पुराने तुम से उकता गये हैं।

आख़िर कब तक सुनते तुम्हारी बातें..
जो तुम कहते हो हाथों को हिलाते..
शायद डर लगने लगा उन्हें तुम्हारी आखों से..
तेज़ साँसों के साथ निकलती तेज़ आवाज़ों से।

कभी मज़ेदार थे तुम उनके लिए भी..
जब कहते थे क़िस्से जो उन्हें पसंद थे..
अब आते हो लिए उतरा चेहरा.. मायूसी की हवा..
क्यूँ बताते हो कुछ और भी हो तुम.. मज़ाक़ के सिवा।

चलो अब नए दोस्त बनाएँ जाएँ..
पुराने तुमसे उकता गये हैं।

अब जो सीखा उसे अमल में लाओ..
नए दोस्तों की महफ़िलो में यूँ संभल के जाओ..
लोगों से मिलो.. कुछ सुनो.. कुछ बतलाओ..
उनकी बातों पर मुस्कुराओ.. हाथ मिलाओ।

दोस्तों के लिए “शायर” अपनी शख़्सियत को खोना पड़ेगा..
अब दोस्ती निभाने के लिए भी तुम्हें नक़ली होना पड़ेगा।