हो अगर रूबरू जज़्बात.. तो और सही..
जब चल रही तेरी बात.. तो और सही..

पशोपेश में हैं कह दें के छुपा कर रखें..
है इम्तिहान-ए-बर्दाश्त.. तो और सही..

मेरे सिवा हर लब पर तेरा नाम है ज़ाहिर..
अब मुजरिम से हैं हालात.. तो और सही..

उनके यारों की बज्म में ख़ंजर हम भी लाए हैं..
कोई होने को हो वारदात.. तो और सही..

तेरी पेशानी की सलवटें सब पढ़ ही लेंगे..
चलो शुरू हुए सवालात.. तो और सही..

मुहब्बत भी अब तिजारत सी हो गई शायर..
नफ़ा-नुक़सान हर मुलाक़ात.. तो और सही..