बेसबब ताकना रस्ता तेरे आने को..
अब काम ही क्या रहा मुझ दीवाने को

शोलों पर चला कर जिद्द कर लेते पूरी.. 
रूठ कर जाना ही बचा था आज़माने को ?

आख़री दफ़ा भी ना नज़रें मिलाई तूने..
ये सितम भी याद रहेगा हमें मुसकुराने को

वो तेरी पूछती आखों ने रोका हुआ है मुझे..
आग तो मैं भी लगा सकता था ज़माने को

आँधियाँ उम्र उड़ा कर ले गई सारी..
सूखता जिस्म ही रखा है अब चरमराने को

शमा तुम भी जला कर कभी लाओ शायर..
रोशन हम ही कब तक रखें शामियाने को