मंदिर में शंखनाद हुआ
मस्जिद से अज़ान उठी
ऐ भारत तेरा जनमानस
अब जागा है तो, सोए नहीं

क्या पता उन कुछ घड़ियों में
यदि गरजा हो आकाश भी
ऐ भारत तेरा जनमानस
अब जागा है तो, सोए नहीं

ये नव गीत नहीं बसंत का
है रणभेरी युद्ध भीषण की
ऐ भारत तेरा जनमानस
अब जागा है तो, सोए नहीं

शिथिल शरीर हो जाए भी
किंतु हारे ना कोई मन कहीं
ऐ भारत तेरा जनमानस
अब जागा है तो, सोए नहीं

कर तपस्या भगीरथ सी
अन्ततः आएगी भागीरथी
ऐ भारत तेरा जनमानस
अब जागा है तो, सोए नहीं।